एचआईवी के बारे में जागरुकता फ़ैलाने के मामले में स्मिता ठाकरे द्वारा संचालित नॉन प्रॉफ़्रिट संगठन मुक्ति फ़ाउंडेशन हमेशा से ही आगे रहा है. पिछले दो दशकों ये संगठन सतत रूप से कार्यरत है, जिसे एचआाईवी और एड्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और सामाजिक बदलाव लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है.

विश्‍व एड्स दिवस के दिन एक ‘फ़्रीडम परेड’ का आयोजन किया गया था, जहां स्मिता ठाकरे ने सनी लियोने, निशा हराले और एलजीबीटी समुदायों के साथ मिलकर एक अलग ही अंदाज़ में एचआईवी के प्रति जागरुकता फ़ैलाने का प्रयास किया.

स्मिता ठाकरे ने कहा, “अब वक्त आ गया है कि हम सभी समुदायों से हाथ मिलाते हुए एड्स के प्रति मिलकर जागरुकता फ़ैलाएं और ज़िंदगी का पूरा मज़ा लें, मगर पूरी सावधानी बरतते हुए क्योंकि ज़िंदगी एक ही बार मिलती है.”

एचआईवी और एड्स के मरीज़ों के मामले में भारत का विश्व में स्थान तीसरा है यानि भारत में तकरीबन २१ लाख ऐसे मरीज़ रहते हैं. ऐसे में देशभर में जागरुकता फ़ैलाने की सख़्त ज़रूरत है. भारत में शारीरिक संसर्ग एचआईवी के फ़ैलने की सबसे बड़ी और आम वजहों में से एक है. इस तरह से २०१७-१८ में कुल ८६℅ फ़ीसदी लोग इस बीमारी का शिकार हुए. 

अधिकृत आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ़ साल २०१७-१८ में ही ११६ एचआईवी पॉजिटिव मरीज़ों की मौत मुम्बई में हुई, जिससे पता चलता कि एचआईवी का प्रभाव किस तरह से बढ़ रहा है. ये तो महज़ सरकारी आंकड़ें हैं. असली संख्या इससे कहीं ज़्यादा होने की आशंका है. पूरे देशभर में एचआईवी के सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र में पाये गये.

स्मिता ठाकरे अपील करती है की सारे दर्शक और पाठक को इस मुहिम में शामिल हो जाना चाइये और समाज को चिंतित करनेवाले इस गंभीर मसले को हल करने में मदद करनी चाहिए क्योंकि एचआईवी से मुक्ति का पहला मार्ग जागरुकता ही तो है.