भारत रचनात्मक वस्तुओं के निर्यात में दुनिया के शीर्ष दस विकासशील अर्थव्यवस्था वाले देशों में शामिल हो गया है। हिंदुस्तान से रचनातमक वस्तुओं के निर्यात में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और यह 2005 में 7.4 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2014 में 20.2 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है। यूनाइटेड नेशन (यूएन) के एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रचनात्मक सामानों के निर्यात और आयात में चीन अकेला सबसे बड़ा देश है। यूएन की व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) रिपोर्ट के मुताबिक 2002 से 2015 के बीच रचनात्मक वस्तुओं में चीन का व्यापार हर साल 14 फीसद की दर से बढ़ा है। यह आंकड़ा 2002 से 2015 की अवधि का है।

इस अवधि के दौरान रचनात्मक वस्तुओं के लिए वैश्विक बाजार का मूल्य 2002 में 208 बिलियन अमेरिकी डॉलर से दोगुना होकर 2015 में 509 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, रचनात्मक सामानों के वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने में चीन, हांगकांग (चीन), भारत, सिंगापुर, चीन के ताइवान प्रांत, तुर्की, थाईलैंड, मलेशिया, मैक्सिको और फिलीपींस जैसे शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाएं हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका, फ्रांस, इटली, यूके, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, पोलैंड, बेल्जियम और जापान शीर्ष 10 रचनात्मक सामान निर्यातक थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का रचनात्मक सामान निर्यात का आंकड़ा 2005 में 7.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2014 में 20.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। 2014 में रचनात्मक वस्तुओं के निर्यात में डिज़ाइन किए गए सामान का सबसे ज्यादा असर रहा और यह 17.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। आभूषणों का निर्यात 13.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और इसके बाद फैशन का सामान 3.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। 2005 में रचनात्मक सामान के निर्यात में यूएस भारत का सबसे बड़ा निर्यात भागीदार था, लेकिन 2014 में यूएई के साथ आने से यह दूसरे नंबर पर फिसल गया।