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मिसेज इंडिया अर्थ : जोधपुर की दो बहुओं ने रैंप पर बिखेरा जलवा

जोधपुर। नई दिल्ली में हुए मिसेज इंडिया अर्थ के फिनाले में जोधपुर की दो बहुओं ने रैंप पर अपना जलवा बिखेरते हुए अवार्ड हासिल किए हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रिया सिन्हा ने मिसेज इंडिया अर्थ की रेगुलर केटेगरी में सेकंड रनरअप रही वहीं डॉ. रेखा पटेल ने इको वियर का खिताब जीता।

मिसेज इंडिया अर्थ कांटेस्ट में इस बार जोधपुर की बहु प्रिया सिन्हा रेग्युलर केटेगरी में मिसेज इंडिया अर्थ की सेकंड रनरअप रहीं। उन्हें मिसेज इंडिया कांफिडेंस का खिताब भी मिला। प्रिया अपने पति प्रतीक गौरव के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियर का जॉब कर रही हैं। एयरपोर्ट क्षेत्र में प्रिया का ससुराल है।

प्रिया ने पहली बार किसी ब्यूटी कांटेस्ट में हिस्सा लिया

प्रिया की सास अंजलि श्रीवास्तव ने बताया, प्रिया ने पहली बार किसी ब्यूटी कांटेस्ट में हिस्सा लिया था। इसके लिए प्रतीक ने काफी उत्साहित किया। घरवालों ने भी उसकी ड्रेसेज सलेक्ट करने में काफी मदद की। प्रतीक ने प्रिया के लिए कई ड्रैसेज तैयार करवाईं। प्रिया ने अपनी सफलता का श्रेय पति के साथ बहन को भी दिया।

रोल मॉडल बनना है लक्ष्य

अंबिकापुर में पली-बढ़ी प्रिया बचपन से ही होशियार थी और आईटी से इंजीनियरिंग की है। प्रिया ने बताया, मेरा लक्ष्य एक ऐसी रोल मॉडल बनना है, जो चैरिटी के कार्यों में हिस्सा ले और महिलाओं की ताकत, नई ऊर्जा की मिसाल पेश कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाए।

 

मिसेज इको वियर : डेंटिस्ट और एक बेटे की मां डॉ. पटेल ने कम किया वजन

मिसेज इंडिया अर्थ में इस बार जोधपुर की डॉ. रेखा पटेल ने मिसेज इको वियर का खिताब हासिल किया है। 33 वर्षीय डेंटिस्ट और एक बेटे की मां डॉ. रेखा ने पहली बार किसी ब्यूटी कांटेस्ट में हिस्सा लिया था। इस कांटेस्ट में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना 30 किलो वजन भी घटाया और डांस भी सीखा।

दिल्ली में हुए इस कांटेस्ट के फिनाले में देश भर से 40 प्रतिभागी पहुंचे थे और दो दिन तक कई कैटेगरी में मुकाबले हुए। डॉ. रेखा ने बताया, इस कांटेस्ट में केवल रैंप शो ही नहीं था। दो दिन में कई वर्कशॉप भी हुए। मेकअप, स्टाइलिंग के साथ मोटिवेशन के सेशन भी थे। उन्होंने एक वर्कशॉप के जरिए सेलिब्रिटी फील करने की अहमियत भी बताई।

 

डॉ. रेखा ने बताया कि इको फ्रेंडली कास्ट्यूम राउंड के लिए सब प्रतिभागियों ने कई तरह के प्रयोग किए। किसी ने न्यूज पेपर की ड्रैस बनवाई तो किसी ने सेनेट्री नेपकिन की। कोई बांस की तो टिशू पेपर की ड्रेस पहनकर रैंप पर उतरीं थीं। मैं कुछ यूनिक करना चाहती थीं।

मैंने एग ट्रे की ड्रेस बनाने का सोचा। डिजाइनर से बात की। उसे बताया कि कैसे स्टिच करना है। हार्ड होने के कारण कटिंग में दिक्कत तो आई लेकिन करीब दो महीने की मेहनत के बाद वनपीस ड्रेस तैयार हुई। रेड कलर के बाद इसका लुक बेहतर था और जब रैंप पर उतरीं तो खूब तारीफ मिली।

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