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महाराष्ट्र सरकार के पास है माओवादी समर्थकों के खिलाफ सबूत

भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल

नई दिल्ली भीमा कोरेगांव हिंसा में पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी मामले में महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। सरकार ने कहा है कि इनके खिलाफ पुख्ता सबूत है। ये समाज में अराजकता और हिंसा की योजना बना रहे थे। इनका सबंध प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी)से है।

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि ये केवल हिंसा की तैयारी करने व योजना बनाने में शामिल थे लेकिन इनकी योजना बड़े हिंसा को अंजाम देने की थी। पुणे पुलिस ने इस मामले में कई शहरों में छापेमारी के बाद 28 अगस्त को पांच माअोवादी समर्थकों को गिरफ्तार किया था।

महाराष्ट्र पुलिस ने अराजकता फैलाने का लगाया आरोप

महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार पांचों नक्सलियों की न्यायिक हिरासत की मांग को लेकर हलफनामा दाखिल किया और कहा कि मामले में पूछताछ के लिए आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लिया जाना जरुरी है, क्योंकि नजरबंदी के दौरान उनके फिजिकल मूवमेंट पर रोक रहेगी। लेकिन इस दौरान वो मामले के अन्य आरोपियों को आगाह करके दस्तावेजों से छेड़छाड़ करा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से सारे दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को देने को कहा है, जिससे कि साबित हो सके कि पांचों व्यक्ति हिंसा भड़काने में शामिल रहे हैं।
पुलिस ने कहा कि पांचों गिरफ्तार लोग न सिर्फ हिंसा भडकाने की योजना तैयार करने की गतिविधियों में शामिल थे, बल्कि इनका उद्देश्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काकर पब्लिक प्रापर्टी को नुकसान पहुंचाना था, जिससे समाज में अराजकता फैलाई जा सके। पुलिस ने दावा किया है कि सीपीआई के प्रतिबंधित संगठन ने इसका एजेंडा वर्ष 2009 में तैयार किया था। इससे संबंधित दस्तावेज उनके कंप्यूटर, लैपटॉप, पैनड्राइव और मेमोरी कार्ड से बरामद किया गया है। ऐसे में इनके खिलाफ आपराधिक साजिश का केस बनता है।


इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वरनोन गोंजाल्विस की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पांचों विचारकों को 6 सितंबर तक हाउस अरेस्ट यानी उनके घर पर ही नज़रबंद रखा जाएगा।महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। क्योंकि गिरफ्तार लोगों से अनजान लोगों की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई नहीं करनी चाहिए। इन पांचों के खिलाफ पुख्‍ता और भरोसेमंद सबूत मिले तब जाकर गिरफ्तारी की गई। इन्हें सरकार से मतभेद या असहमति जताने पर गिरफ्तार नहीं किया गया।

इतिहासकार रोमिला थापर सहित पांच लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर प्रोफेसर सुधा भारद्वाज, वामपंथी विचारक वरवर राव, वकील अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वरनोन गोंजाल्विस की गिरफ्तारियों को चुनौती दी है।

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