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ईरान के साथ संबंधों को लेकर झुकने के मूड में नही है भारत

भारत व अमेरिका की टू प्लस टू वार्ता में ईरान का मुद्दा रहेगा हावी

नई दिल्ली। गुरुवार को भारत व अमेरिका की टू प्लस टू वार्ता में ईरान का मुद्दा निश्चित तौर पर हावी रहेगा, लेकिन भारत इस पर झुकने के मूड में कतई नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री व रक्षा मंत्री की टीम को भारत यह समझाने की भरपूर कोशिश करेगा कि ईरान के साथ उसके रिश्ते को कमजोर करने का मतलब होगा भारत को कमजोर करना। साथ ही भारत यह भी बताएगा कि किस तरह से ईरान के साथ उसके रिश्ते इस क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए भी जरुरी है। भारत को भरोसा है कि इन तर्को पर अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल पोम्पीओ उसी तरह से रजामंद होंगे जैसे पूर्व विदेश मंत्री जेम्स टिलरसन हुए थे।

ईरान से तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता भारत

सूत्रों के मुताबिक हमारे पास तीन ठोस तर्क हैं जिन्हें अमेरिकी पक्षकारों के सामने रखा जाएगा। सबसे पहली बात तो यही है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक ईरान पर निर्भर है। भारत अपनी जरूरत का 83 फीसद कच्चा तेल आयात करता है और इसका एक चौथाई तेल ईरान से लेता है। ऐसे में भारत अचानक ईरान से तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता।

भारत का दूसरा तर्क यह है कि तकनीकी तौर पर भारत की कई रिफाइनरियों के लिए ईरान का तेल उपयुक्त होता है। इस तरह के क्रूड दूसरे देश नहीं दे सकते है। इन रिफाइनरियों में अगर दूसरी जगह के क्रूड का इस्तेमाल किया जाएगा तो उसके लिए भारी भरकम नए निवेश करने होंगे।

इसके साथ ही भारत का यह तर्क भी होगा कि ईरान के साथ रिश्ते तोड़ने का मतलब होगा अफगानिस्तान में शांति बहाली की कोशिशों को नुकसान पहुंचाना। क्योंकि भारत की मदद से ईरान में बनाये जा रहे चाबहार पोर्ट का काम प्रभावित होगा।

सूत्रों के मुताबिक चाबहार पोर्ट को सिर्फ भारत की तरफ से निर्मित एक परियोजना के तौर पर नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे अफगानिस्तान के लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के तौर पर देखा जाना चाहिए। भारत व अमेरिका अफगानिस्तान में लंबी अवधि के लिए शांति स्थापित करने की कोशिश में है। इसमें इस पोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

एक हफ्ते बाद होगी भारत की ईरान अफगानिस्तान के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक

भारतीय पक्षकारों का मूड यही है कि वह ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को लेकर फौरी तौर पर कोई फैसला नहीं करने जा रहे। इसका संकेत इस बात से भी चलता है कि अमेरिका के साथ टू प्लस टू वार्ता के एक हफ्ते बाद ही भारत की ईरान व अफगानिस्तान के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसमें भारत की अगुवाई विदेश सचिव विजय गोखले करेंगे।


उक्त सूत्रों का कहना है कि ईरान को लेकर पूरी साफगोई के साथ अमेरिका के साथ वार्ता होगी। यह वहां की सरकार को तय करना है कि वह इस पर क्या फैसला करती है। अगर इस विचार विमर्श के बाद भी अमेरिकी रुख में बदलाव नहीं आता है तो इस बारे में अंतिम फैसला उच्च स्तर पर सरकार देश के हितों को ध्यान में रखते हुए करेगी।

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